उत्तराखंड कांग्रेस में गुटबाजी तेज़

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देहरादून, राज्य ब्यूरो

भले ही 3 राज्यों में विधानसभा चुनाव की जीत कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जोश भर रही हो। लेकिन उत्तराखंड में कांग्रेस संगठन और नेताओं के बीच नफरत की खाई लगातार बढ़ती जा रही है। हालात यहां तक आ चुके हैं की प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ विधायक और संगठन के नेता भी अब आमने-सामने आ रहे हैं। आखिर क्यों उत्तराखंड कांग्रेस में जंग से हालात बने हुए हैं

दो दिन पहले कांग्रेस संगठन की ओर से अनुशासन समिति ने नैनीताल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मारुति शाह, पार्टी के प्रदेश महामंत्री खजान पांडे, कांग्रेस चमोली के अध्यक्ष संजय रावत, अनुसूचित जाति विभाग के रुद्रप्रयाग जिला अध्यक्ष कुंवर लाल आर्य को अनुशासन समिति द्वारा 6 साल से पार्टी से निष्कासित किया गया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन के बाद कांग्रेसमें जैसे भूचाल आ गया। मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा ने हल्द्वानी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा की पार्टी संविधान के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है जबकि अनुशासन समिति के अध्यक्ष को यह अधिकार नहीं है कि वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का निष्कासन कर सके। वहीं मामले पर उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि जिन लोगों ने पार्टी के खिलाफ कार्य किया है उन को निष्कासित किया गया है। विधायकों की नाराजगी को लेकर प्रीतम सिंह का कहना है कि 16 दिसंबर को संगठन की बैठक के दौरान नाराज नेताओं से बातचीत की जाएगी।

कांग्रेसी नेताओं के निष्कासन की कार्रवाई के मामले में सिर्फ विधायक ही नाराज नहीं है। बल्कि कांग्रेस संगठन के वरिष्ठ नेता भी इस फैसले के खिलाफ नजर आ रहे हैं। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट का कहना है कि पार्टी संविधान के अनुसार पार्टी नेताओं को पहले नोटिस दिया जाता है और उन्हें जवाब देने का समय दिया जाता है। जबकि यहां अनुशासन समिति ने ही कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए जबकि अनुशासन समिति सिर्फ अध्यक्ष को अपनी सलाह भेजती है। कांग्रेस के जिन नेताओं का निष्कासन किया गया है वह सभी कांग्रेस के कई सालों से पुराने सिपाही रहे हैं। जोत सिंह बिष्ट ने कड़े शब्दों में यह तक कह दिया कि कांग्रेस पार्टी किसी एक व्यक्ति की नहीं है यह पार्टी के कार्यकर्ताओं की है और ऐसे में तानाशाही पूर्ण फैसले संगठन के हित के लिए नहीं।

कांग्रेस संगठन की कार्रवाई के बाद विधायक और कांग्रेस संगठन के पदाधिकारी ही प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के फैसलों के खिलाफ नजर आ रहे हैं अब ऐसे में यह साफ है कि अगर कांग्रेस में इसी तरह से गुटबाजी बनी रही तो एक कांग्रेस के लिए आगामी लोकसभा चुनाव के लिहाज से ठीक नहीं होगा।

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