देहरादूनः उत्तराखंड में धर्मनगरी में धर्म संसद के दौरान दिए गए भड़काऊ भाषण के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के चीफ सेक्रेटरी को यह सुनिश्चित करे कि कहा कि रुड़की में बुधवार को होने वाले कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण नहीं दिए जाएं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए थे क्या। साथ ही कोर्ट ने सवाल किया कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक दिशा-निर्देशों का अनुपालन राज्य सरकार ने किया या नहीं, इस पर हलफनामा दाखिल करें।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार उत्तराखंड के रुड़की में कल यानी 27 अप्रैल को महापंचायत का आयोजन होने वाला है। इससे पहले कई राज्यों में धर्म संसद का आयोजन हो चुका है। इस पर पीठ ने उत्तराखंड के वकील से कहा, हम अब आपको कल होने वाले कार्यक्रम के बारे में सूचित कर रहे हैं, कार्रवाई करें। पीठ ने टिप्पणी कि अगर रुड़की धर्म संसद में कुछ होता है तो वह मुख्य सचिव को मौजूद रहने के लिए कहेगी।  पीठ ने कहा, इसमें भरोसा नहीं है कि ऐसा दोबारा नहीं होगा। आप जानते हैं कि इन धर्म संसद में क्या कहा जाता है। पीठ ने उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश वकील को कहा कि आप जानते हैं कि उपाय क्या हैं, आपको वह करना है। और अगर फिर भी ऐसा होता है तो हम मुख्य सचिव को उपस्थित रहने के लिए कहेंगे। उत्तराखंड सरकार के वकील ने कहा कि हमें दो मिनट पक्ष रखने का मौका दिया जाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपको आगे की तारीख दी गई है। स्थिति रिपोर्ट पर विचार करेंगे। उत्तराखंड सरकार ने कहा कि हमने एफआईआर दर्ज करने समेत सभी कदम अदालत के फैसले के मुताबिक उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार के वकील को फटकार लगाई और कहा कि- इस तरह से आप तर्क नहीं दे सकते हैं. आप संविधान से बंध हुए हैं।

गौरतलब है कि हिन्दू साधु संतों द्वारा 17 से 19 दिसंबर तक धर्म संसद का आयोजन किया गया था। धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आह्वान किया गया था। यहीं नहीं मुसलमानों के पवित्र ग्रन्थ कुरान व पैगम्बर साहब के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग भी किया गया। भड़काऊ भाषण से जिले में अशांति का माहौल जितेंद्र नारायण त्यागी , यति नरसिंघानन्द और अन्य लोगों ने बाद में इसका वीडियो भी वायरल कर दिया था। इस भड़काऊ भाषण से जिले में अशांति का माहौल बना रहा। भारत सहित अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की किरकिरी हुई। प्रबोधानंद गिरी द्वारा हरिद्वार की मस्जिदों में रह रहे लोगों के खिलाफ हिंसा फैलाए जाने का प्रयास भी किया गया। 32 पूर्व अधिकारियों ने लिखा था खुला पत्र वहीं हरिद्वार में वर्ग विशेष के खिलाफ दिए गए भड़काऊ भाषणों के मामले में पूर्व सेनाध्यक्षों समेत कई मशहूर लोगों द्वारा कार्रवाई की मांग करने के एक दिन बाद भारतीय विदेश सेवा ( आईएफएस ) के 32 पूर्व अधिकारियों ने खुला पत्र लिखा था। आईएफएस के 32 पूर्व अधिकारियों ने कहा था कि किसी भी तरह की हिंसा के आह्वान की निंदा करते समय धर्म जाति , क्षेत्र या वैचारिक मूल का लिहाज नहीं किया जाना चाहिए।

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