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मसूरी पहाड़ों की रानी मसूरी की ऐतिहासिक मालरोड अब एक नए युग की दहलीज पर खड़ी है। दशकों से पर्यटकों को मालरोड की सैर कराने वाले पारंपरिक साइकिल रिक्शा अब इतिहास का हिस्सा बनने जा रहे हैं। प्रशासन ने शहर के सौंदर्यीकरण और यातायात को आधुनिक बनाने के लिए साइकिल रिक्शों की जगह गोल्फ कार्ट और ई-रिक्शा चलाने का बड़ा निर्णय लिया है।

​मसूरी नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन के अनुसार, मालरोड पर बढ़ते दबाव को कम करने और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए यह बदलाव अनिवार्य हो गया था। योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

​प्रथम चरण: शुरुआत में लगभग 40 गोल्फ कार्ट सड़कों पर उतारी जाएंगी।
​रोजगार सुरक्षा: हर गोल्फ कार्ट में दो लोगों को समायोजित किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक श्रमिकों को काम मिल सके।
​विस्तार: यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो गोल्फ कार्ट केवल मालरोड ही नहीं, बल्कि मसूरी के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी चलाई जाएंगी।
​श्रमिकों के लिए राहत पैकेज और विकल्प

​प्रशासन ने इस बदलाव से प्रभावित होने वाले 121 रिक्शा श्रमिकों के हितों का भी ध्यान रखा है। अधिशासी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि विस्थापन को संतुलित करने के लिए ‘चरणबद्ध’ तरीका अपनाया जाएगा:

​मुआवजा: जो श्रमिक रिक्शा संचालन छोड़ना चाहते हैं, उन्हें लगभग 2.25 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा।
​महिला सशक्तिकरण: विशेष रूप से 13 विधवा महिलाओं को वेडिंग जोन में शिफ्ट किया जाएगा, ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित रहे।
​अंतिम प्रस्ताव: रिक्शा चालकों को अपनी राय और प्रस्ताव देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है, जिसके बाद अंतिम निर्णय लागू होगा।

​”मालरोड के सौंदर्यीकरण के लिए यह कदम जरूरी है। हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी श्रमिक का रोजगार प्रभावित न हो और पर्यटकों को एक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल अनुभव मिले।”

— गौरव भसीन, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद

 

 

​मालरोड पर साइकिल रिक्शा केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि मसूरी की पहचान रहे हैं। जहाँ एक ओर प्रशासन इसे पर्यावरण और सुगमता की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है, वहीं दूसरी ओर पीढ़ियों से यह काम कर रहे परिवारों के लिए यह बदलाव भावनात्मक भी है। अब देखना यह होगा कि आधुनिक ‘गोल्फ कार्ट’ मसूरी की विरासत को कितनी खूबसूरती से आगे बढ़ा पाती हैं।

By admin

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