उत्तराखंड पलायन आयोग का बड़ा खुलासा -
उत्तराखण्ड से पलायन कैसे रोका जाए इस दिशा में अब की सरकारों ने तमाम प्रयास किए। कई कदम उठाए पर अभी तक ये कदम सार्थक साबित नहीं हो पाए हैं। ये हकीकत  उतनी ही भयावह जितना सच ये आंकड़े बता रहे हैं। जिस जिले से 5 मुख्यमंत्री आते हो उस जिले पौड़ी के आंकड़े देखिए पिछले 7 साल के दौरान 298 गांवों में पलायन हुआ है और 186 गांव पूरी तरह से खाली हो चुके हैं।पलायन, बेरोजगारी और क्षेत्रीय विकास की अवधारणा को लेकर उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ। उत्तराखंड में 18 साल बाद भी ये तमाम मुद्दे जस के तस हैं। रोजगार की तलाश में पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं का पलायन बदस्तूर जारी है। मूलभूत सुविधाओं के आभाव में पहाड़ों के गांव के गांव खाली हो रहे हैं।
पौड़ी जिले के विभिन्न विकासखण्डों में खाली गांव के आंकड़े
  • बीरोंखाल 16
  • दुगड्डा 12
  • द्वारीखाल 9
  • एकेश्वर 6
  • कल्जीखाल 12
  • खिर्सू 8
  • कोट 28
  • नैनीडांडा 5
  • पाबौ 7
  • पौड़ी 27
  • पोखड़ा 9
  • रिखणीखाल 29
  • थैलीसैण 8
  • यमकेश्वर 8
  • जयहरीखाल 2
पलायन के ये आंकड़े पौड़ी में विकास और रोजगार की कहानी आपको दिखा रहे हैं। हालात तब हैं जब यहां से वर्तमान सीएम त्रिवेंद्र रावत, पूर्व सीएम
बीसी खंडूरी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा प्रदेश ने प्रदेश की सत्ता संभाली। इसके साथ ही देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश की सत्ता संभालने वाले योगी आदित्यनाथ भी पौड़ी जिले से ही हैं। इसके अलावा बिपिन रावत, अजित डोभाल, अनिल धस्माना, राजेन्द्र सिंह, अनिल कुमार भट्ट, ओम प्रकाश रावत ये तमाम नाम पौड़ी जिले के हैं जिन्होंने देश में अपना और पौड़ी का नाम रोशन किया है।
ग्राम विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी नेगी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पौड़ी जिले के पलायन की रिपोर्ट सौंपकर सकारात्मक पहल का सुझाव दिए हैं। इससे पहले मई महीने में पलायन आयोग ने 13 जिलों का सर्वे कराकर सीएम को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद सरकार ने ब्लाक और जिलेवार रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। पौड़ी में सबसे हृदय विदारक बात ये है कि गांव में यदि किसी की मौत होती है तो वहां कंधा देने के लिए पुरुष नहीं मिल पाते। दूसरे गांव से फोन करके लोगों को कंधा देने के लिए बुलाया जाता है। सबसे खराब स्थिति नैनीडांडा ब्लाक की है।
186 गांव पूरी तरह से खाली
112 गांव में 50 प्रतिशत गैर आबादी
शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत बढोत्तरी
ग्रामीण क्षेत्रों में 5 प्रतिशत की कमी
प्रदेश की सरकारों ने तमाम कवायद के बाद भी पहाड़ की जवानी रोकने में सफल नहीं हो पाई हैं। अब देखना होगा कि आने वाले समय में सरकार का प्रयास कितना सार्थक साबित होगा और उजड़े गांवों को बसाया जा सके।

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One thought on “उत्तराखंड पलायन आयोग का बड़ा खुलासा”
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