पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ड्रीम प्रोजेक्ट सूर्यधारझील में वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि हो गई है। इस पर सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने इस मामले के दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। दरअसल, राज्य में आचार संहिता लगने से चार दिन पहले यानी चार जनवरी को इस मामले में तीन सदस्यीय विभागीय समिति की जांच रिपोर्ट पर मंत्री ने आदेश दिए। जिसमें उन्होंने निर्देश दिए कि डीपीआर निर्माण का परीक्षण करने वाले अधिकारियों, डीपीआर निर्माण कंसल्टेंट और परियोजना से जुड़े अन्य अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि 29 जून 2017 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सूर्यधार झील के निर्माण की घोषणा की थी। 22 दिसंबर 2017 को इसके लिए 50 करोड़ 24 लाख रुपये का बजट मंजूर कर दिया गया। इसके बाद 27 अगस्त, 2020 को सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने सूर्यधार बैराज निर्माण स्थल का निरीक्षण किया तो उनका माथा ठनका। क्योकि, सूर्यधार जलाशय निर्माण परियोजना का निर्माण कार्य करीब 62 करोड़ रुपये में कराया गया। जबकि प्रशासनिक वित्तीय स्वीकृति मात्र 50.24 करोड़ रुपये थी। मौके पर खामियां सामने आने पर महाराज ने जांच के आदेश दे दिए थे।
मामले की जांच को 16 फरवरी, 2021 को तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। इस समिति ने 31 दिसंबर 2021 को शासन को रिपोर्ट सौंप दी। पर्यटन मंत्री महाराज को चार जनवरी 2022 को रिपोर्ट मिली तो उन्होंने कार्रवाई के निर्देश दे दिए। अब सिंचाई सचिव हरिचंद सेमवाल ने इस मामले में सिंचाई विभाग के एचओडी प्रमुख अभियंता इंजीनियर मुकेश मोहन को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। संपर्क करने पर एचओडी ने कहा कि शासन के निर्देश प्राप्त हुए हैं। इस पर कार्रवाई चल रही है।

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